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Shruti chhaya
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किसे सूरज किसे चंदा कहें हम
किसे अब आँख का तारा कहें हम
किसे अब आँख का तारा कहें हम
तेरे दर से भी हम प्यासे ही लौटे
बता कैसे तुझे दरिया कहें हम
वफ़ा की आबरू रखनी है हम को
तो तुझ को किसलिए झूटा कहें हम
तुम्हीं से थी महज़ दुनिया हमारी
तुम्हीं बोलो किसे दुनिया कहें हम
हजारों ज़ख़्म दिल से आ लगें हैं
किसे आला किसे अच्छा कहें हम
मुहब्बत ने हमारी जान ली है
इसे अब ज़हर की पुड़िया कहें हम
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दो नन्हीं कलियों ने रोक लिया वरना
तितली ने तो आज धतूरा खाना था
तितली ने तो आज धतूरा खाना था
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