यार मुसलसल नख़रा करना अच्छा नइँ
ग़ैर के दिल पे क़ब्ज़ा करना अच्छा नइँ
फ़लाँ फ़लाँ से क्या बातें करते हो तुम
रोज़ इसी का झगड़ा करना अच्छा नइँ
देख हमें बदनाम न कर दे ये दुनिया
इश्क़ का सब से चर्चा करना अच्छा नइँ
क्या ऐसे हर बात पे रोया करती हो
जान मेरी दिल कच्चा करना अच्छा नइँ
जितनी चादर उतने पैर पसारा कर
हद से ज़्यादा ख़र्चा करना अच्छा नइँ
— Shruti chhaya















