बिन तुम्हारे ज़िंदगी ये ज़िंदगी है ही नहीं

इस से बढ़ कर इश्क़ में बेचारगी है ही नहीं

लड़खड़ाते ये क़दम गर तुम तलक पहुँचे नहीं
आशिक़ी में फिर मिरी दीवानगी है ही नहीं

आप सँवरे और सजे यूँ आइने के सामने
आप के जैसी किसी में सादगी है ही नहीं

सामने होते हुए भी आप नज़रें फेर लें
इस से बढ़ कर इश्क़ में नाराज़गी है ही नहीं

उम्र-भर के वास्ते इक दूसरे के हो गए
इस से ज़्यादा इश्क़ की पाकीज़गी है ही नहीं

— Shruti chhaya

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