किसको कितना पड़ गया है 'इश्क़ भारी छोड़िए
'इश्क़ कीजे और ये सब दुनियादारी छोड़िए
इस सेे पहले लोग मेरा नाम लेते चीख़कर
दिल ये बोला उठिए अब तो अपनी बारी छोड़िए
चार दिन की ज़िंदगी हम जी न पाए चार पल
इसलिए तो कह रहे हैं ज़िम्मेदारी छोड़िए
उसके नज़राने हैं सारे रेशमी क्या सूत क्या
साड़ियाँ तो साड़ियाँ हैं आरी तारी छोड़िए
बस यही तो चाहती हैं आपसे क़ुर्बानियाँ
हर तरह से आप अपनी चीज़ प्यारी छोड़िए
चोट ही दे कर गए वो जो भी थे मुझको अज़ीज़
मैं अकेले ख़ुश हूँ 'छाया' यारी वारी छोड़िए
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