करता है मुझ सेे रोज़ तू तकरार शुक्रिया

इस
में महक रहा है तेरा प्यार शुक्रिया

जैसे लुटा रहा है वो मुझ पर मुहब्बतें
करती हूँ दिल से उस का में सौ बार शुक्रिया

उस की मोहब्बतों पे लुटा दूँ ये ज़िन्दगी
जिस ने दिया है मुझ को ये संसार शुक्रिया

हाज़िर है मेरी जान भी मुर्शिद तेरे लिए
तू ने किए हैं स्वप्न ये साकार शुक्रिया

मुझ को तो शा'इरी का नहीं था कोई शऊर
अब पा लिया मक़ाम ये सरकार शुक्रिया

— Shruti chhaya

More by Shruti chhaya

Other ghazal from the same pen

See all from Shruti chhaya →

Life Shayari

Shers of life.

All Life Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling