
क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना
ये बात कभी मुझ से दुबारा नहीं कहना
ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है
कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
— Ali Zaryoun
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