Kishwar naheed

Kishwar naheed

@kishwar-naheed

Kishwar naheed shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kishwar naheed's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो हमीं ने प्यार माँगा था हमीं ने दाग़ पाए हैं — Kishwar naheed

Ghazal

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं साहिल साहिल जज़्बे थे और दरिया दरिया पहुँची मैं शहर में उस के नाम के जितने शख़्स थे सब ही अच्छे थे सुब्ह-ए-सफ़र तो धुँद बहुत थी धूपें बन कर निकली में उस की हथेली के दामन में सारे मौसम सिमटे थे उस के हाथ में जागी मैं और उस के हाथ से उजली मैं इक मुट्ठी तारीकी में था इक मुट्ठी से बढ़ कर प्यार लम्स के जुगनू पल्लू बाँधे ज़ीना ज़ीना उतरी मैं उस के आँगन में खुलता था शहर-ए-मुराद का दरवाज़ा कुएँ के पास से ख़ाली गागर हाथ में ले कर पलटी मैं मैं ने जो सोचा था यूँँ तो उस ने भी वही सोचा था दिन निकला तो वो भी नहीं था और मौजूद नहीं थी मैं लम्हा लम्हा जाँ पिघलेगी क़तरा क़तरा शब होगी अपने हाथ लरज़ते देखे अपने-आप ही संभली मैं — Kishwar naheed
कभी भुलाया नहीं याद भी किया नहीं है ये कैसा जुर्म है जिस में कोई सज़ा नहीं है मैं बात बात पे रोने का माजरा पूछूँ वो हँस रहा है बताने को कुछ रहा नहीं है ज़मीं पे आह-ओ-बुका और ख़ून-ए-नाहक़ भी ज़बान-ए-ख़ल्क़ ये पूछे है क्या ख़ुदा नहीं है कलाम करने को नासेह रहा न वाइ'ज़ है मैं क्या कहूँ कि मिरे पास बद-दुआ' नहीं है बस अब तो आँख में सहरा ही जम गया आ के समझ लो ख़्वाब भी दहलीज़ पे रखा नहीं है क़दम क़दम पे वही तिलमिलाती ख़्वाहिश है पयाम लाने को कोई भी दिलरुबा नहीं है मिरी उदासी मिरे काम आ सकी न कभी बस अब सवाल भी करने का हौसला नहीं है रक़ीब-ए-ख़्वाहिश-ए-मौजूदा सुन लिया तू ने चमन बहुत हैं मगर कोई देखता नहीं है — Kishwar naheed