Mohammad Alvi

Top 10 of Mohammad Alvi

    'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
    सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं

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    अब तो चुप-चाप शाम आती है
    पहले चिड़ियों के शोर होते थे

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    मौत न आई तो 'अल्वी'
    छुट्टी में घर जाएँगे

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    उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी
    दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो

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    सर्दी में दिन सर्द मिला
    हर मौसम बेदर्द मिला

    ऊँचे लम्बे पेड़ों का
    पत्ता पत्ता ज़र्द मिला

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    आग अपने ही लगा सकते हैं
    ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं

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    दिन इक के बा'द एक गुज़रते हुए भी देख
    इक दिन तू अपने आप को मरते हुए भी देख

    हर वक़्त खिलते फूल की जानिब तका न कर
    मुरझा के पत्तियों को बिखरते हुए भी देख

    हाँ देख बर्फ़ गिरती हुई बाल बाल पर
    तपते हुए ख़याल ठिठुरते हुए भी देख

    अपनों में रह के किस लिए सहमा हुआ है तू
    आ मुझ को दुश्मनों से न डरते हुए भी देख

    पैवंद बादलों के लगे देख जा-ब-जा
    बगलों को आसमान कतरते हुए भी देख

    हैरान मत हो तैरती मछली को देख कर
    पानी में रौशनी को उतरते हुए भी देख

    उस को ख़बर नहीं है अभी अपने हुस्न की
    आईना दे के बनते-सँवरते हुए भी देख

    देखा न होगा तूने मगर इंतिज़ार में
    चलते हुए समय को ठहरते हुए भी देख

    तारीफ़ सुन के दोस्त से 'अल्वी' तू ख़ुश न हो
    उस को तिरी बुराइयाँ करते हुए भी देख

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    नया साल दीवार पर टाँग दे
    पुराने बरस का कैलेंडर गिरा

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    धूप ने गुज़ारिश की
    एक बूँद बारिश की

    लो गले पड़े काँटे
    क्यूँ गुलों की ख़्वाहिश की

    जगमगा उठे तारे
    बात थी नुमाइश की

    इक पतिंगा उजरत थी
    छिपकिली की जुम्बिश की

    हम तवक़्क़ो' रखते हैं
    और वो भी बख़्शिश की

    लुत्फ़ आ गया 'अल्वी'
    वाह ख़ूब कोशिश की

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    सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है
    इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए

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