धूप ने गुज़ारिश कीएक बूँद बारिश कीलो गले पड़े काँटेक्यूँ गुलों की ख़्वाहिश कीजगमगा उठे तारेबात थी नुमाइश कीइक पतिंगा उजरत थीछिपकिली की जुम्बिश कीहम तवक़्क़ो' रखते हैंऔर वो भी बख़्शिश कीलुत्फ़ आ गया 'अल्वी'वाह ख़ूब कोशिश की— Mohammad Alvi