हमें तुमसे शिकायत तो नहीं बस
    तुम्हें यकदम से छोड़ा जा रहा है

    किसी की याद क़ाबिज़ है नहीं तो
    जुनूँ में सर को फोड़ा जा रहा है
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    Shamsul Hasan ShamS
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    मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया
    किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
    Shamsul Hasan ShamS
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    हम ऐसे ढूँढते हैं तुझको जैसे
    मुसाफ़िर थक के साया ढूँढता है
    Shamsul Hasan ShamS
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    आप चाहें तो कहीं और भी रह सकते हैं
    दिल हमारा है तो मर्ज़ी भी हमारी होगी
    Shamsul Hasan ShamS
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    मंज़िल पे नहीं आ सका है कोई अभी तक
    उससे छुड़ा के हाथ सभी रास्ते में हैं
    Shamsul Hasan ShamS
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    हम अपने आप मर जाएँगे इक दिन
    तुम्हारा छोड़ना ज़ाया रहेगा
    Shamsul Hasan ShamS
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    ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे हर बला से
    तेरी आँखों का सदक़ा दे रहा हूँ
    Shamsul Hasan ShamS
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    तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ
    हम दोनों इक साथ खरीदे जाएँगे
    Shamsul Hasan ShamS
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    सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन
    तुम्हारी बददुआ को सात बोसे
    Shamsul Hasan ShamS
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    इक शख़्स क्या गया है मेरा हाथ छोड़कर
    दिल लग नहीं रहा है अकेले हयात में
    Shamsul Hasan ShamS
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