Shamsul Hasan ShamS

Shamsul Hasan ShamS

@shams_lyricist

Shamsul Hasan ShamS shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shamsul Hasan ShamS's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
कब तलक उसकी जुदाई का करेंगे मातम
यार अब हल भी तो करने हैं मसाइल घर के
Shamsul Hasan ShamS
हमें तुमसे शिकायत तो नहीं बस
तुम्हें यकदम से छोड़ा जा रहा है

किसी की याद क़ाबिज़ है नहीं तो
जुनूँ में सर को फोड़ा जा रहा है
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Shamsul Hasan ShamS
कुछ दिनों से मैं यूँ परेशाँ हूँ
मेरी मिट्टी से क्या बना है मेरा
Shamsul Hasan ShamS
बहुत करने लगी हो ज़िक्र मेरा
किसी दिन इश्क़ कर बैठोगी मुझसे
Shamsul Hasan ShamS
आ रही है हिज़्र की बू आपकी परछाईं से
आपको तो वस्ल की ख़ुशबू लगानी चाहिए
Shamsul Hasan ShamS
मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया
किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
Shamsul Hasan ShamS
बहुत आगे निकल सकता हूँ लेकिन
तुम्हारा इश्क़ आड़े आ रहा है
Shamsul Hasan ShamS
यार किस रम्ज़ से होती हैं तेरी आँखें नम
कौन सा दुख है मोहब्बत के अलावा तुझको
Shamsul Hasan ShamS
ज़ख़्म भरते नहीं हैं तेरे दिए
थक गये हम दवा बनाते हुए
Shamsul Hasan ShamS
हम ऐसे ढूँढते हैं तुझको जैसे
मुसाफ़िर थक के साया ढूँढता है
Shamsul Hasan ShamS
आप चाहें तो कहीं और भी रह सकते हैं
दिल हमारा है तो मर्ज़ी भी हमारी होगी
Shamsul Hasan ShamS
मंज़िल पे नहीं आ सका है कोई अभी तक
उससे छुड़ा के हाथ सभी रास्ते में हैं
Shamsul Hasan ShamS
जो उसके साथ बाँधी थी रिवायत तोड़ दी मैंने
जो वो पूछे तो कह देना मोहब्बत छोड़ दी मैंने
Shamsul Hasan ShamS
मैं इसलिए भी मोहब्बत न कर सका तुमसे
तुम्हारा इश्क़ मेरा रिज़्क़ छीन सकता था
Shamsul Hasan ShamS
डर था तन्हाईयाँ थीं वहशत थी
मुझसे एक शख़्स को मोहब्बत थी

उसके उतना ही काम आया मैं
जिसको जितनी मेरी ज़रूरत थी
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Shamsul Hasan ShamS
हम अपने आप मर जाएँगे इक दिन
तुम्हारा छोड़ना ज़ाया रहेगा
Shamsul Hasan ShamS
कलेजा खींचती है याद उसकी
वो इक चेहरा बहुत याद आ रहा है

तुम्हारे हिज्र का ग़म इन दिनों में
मेरे चहरे की रौनक़ खा रहा है
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Shamsul Hasan ShamS
कह दिया काफ़िर उसे तो क्या वो काफ़िर हो गया
कौन जाने किसके सीने में ख़ुदा मौजूद है
Shamsul Hasan ShamS
ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे हर बला से
तेरी आँखों का सदक़ा दे रहा हूँ
Shamsul Hasan ShamS
ये पानी सर से ऊपर हो रहा है
घड़े में किसने पत्थर भर दिए हैं
Shamsul Hasan ShamS

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