अब आख़िरी बची है ये दीवार चारागर
बन जाएगा मकान ये घर बार चारागर
अच्छे नहीं हैं अब मेरे आसार चारागर
तू ने भी हाथ खींच लिया यार चारागर
चुप इसलिए खड़े हैं सभी देखकर मुझे
नज़दीक आए मौत के आज़ार चारागर
तेरी जुदाई शहर के हाकिम को खा गई
कल से पड़ा हुआ है वो बीमार चारागर
जब से तुम्हारे 'इश्क़ का इल्ज़ाम सर पे है
तब से हुई है ज़िंदगी दुश्वार चारागर
किस हाल में हूँ कुछ तो ख़बर ले कभी मेरी
आकर तू मुझ सेे मिल कभी एक बार चारागर
ज़ख़्मों पे कोई फूँक भी मारे तो दर्द हो
कैसे बताएँ कितने हैं लाचार चारागर
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