अब आख़िरी बची है ये दीवार चारा-गर
बन जाएगा मकान ये घर बार चारा-गर
अच्छे नहीं हैं अब मेरे आसार चारा-गर
तू ने भी हाथ खींच लिया यार चारा-गर
चुप इस लिए खड़े हैं सभी देख कर मुझे
नज़दीक आए मौत के आज़ार चारा-गर
तेरी जुदाई शहर के हाकिम को खा गई
कल से पड़ा हुआ है वो बीमार चारा-गर
जब से तुम्हारे इश्क़ का इल्ज़ाम सर पे है
तब से हुई है ज़िंदगी दुश्वार चारा-गर
किस हाल में हूँ कुछ तो ख़बर ले कभी मेरी
आ कर तू मुझ से मिल कभी एक बार चारा-गर
ज़ख़्मों पे कोई फूँक भी मारे तो दर्द हो
कैसे बताएँ कितने हैं लाचार चारा-गर
— Shamsul Hasan ShamS















