तेरे रहने की जगह दिल है हमारा आख़िर
तुझ को करना है कहीं और गुज़ारा आख़िर
लाल जोड़े में तुझे ले गया मासूम कोई
मिल गया बा'द मेरे तुझ को सहारा आख़िर
ठीक उस के भी वही दोस्त हुआ जैसा मेरे
क़त्ल हो ही गया क़ातिल भी हमारा आख़िर
वो तो हर मोड़ पे पलटा था बिछड़ के तुझ से
तू ने एक बार नहीं उस को पुकारा आख़िर
ये ही लिख सकता है किस्मत में जुदाई मेरी
कर भी क्या सकता है भगवान तुम्हारा आख़िर
— Shamsul Hasan ShamS















