कोई तो बात ख़ूब-सूरत कर
सारे लम्हात ख़ूब-सूरत कर
आ कभी ज़िंदगी में तू मेरी
मेरे दिन रात ख़ूब-सूरत कर
ले पकड़ हाथ उम्रभर के लिए
ये मेरे हाथ ख़ूब-सूरत कर
ऐसे मिल जा कि फ़ासला ना रहे
हर मुलाक़ात ख़ूब-सूरत कर
बैठ नज़दीक आ के मेरे साथ
मेरी औक़ात ख़ूब-सूरत कर
— Shamsul Hasan ShamS














