पहले इक तरक़ीब निकाली जाती है
फिर उसकी तस्वीर बना ली जाती है
धीरे धीरे बचपन ढलता जाता है
और ख़ुद से उम्मीद लगा ली जाती है
दिन की सूरत चाँद सितारे तकते हैं
और सूरज से रात निकाली जाती है
पहले हमको गिफ़्ट दिए जाते हैं फिर
हम सेे वो ही चीज़ चुरा ली जाती है
पहली सूरत इनकारी की सूरत में
'इश्क़ से अपनी जान बचा ली जाती है
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