taptee hui dopahar ka saaya alag kiya | तपती हुई दोपहर का साया अलग किया

  - Shamsul Hasan ShamS

तपती हुई दोपहर का साया अलग किया
कल रात तेरी याद से रिश्ता अलग किया

इस दर्जा तेरे हिज्र का सदमा लगा मुझे
बिस्तर अलग किया कभी कमरा अलग किया

इक दोस्त मिल गया था अदू के लिबास में
सो मैंने आस्तीन का झगड़ा अलग किया

रिश्तों की एक नींव जो कच्ची निकल गई
तो मैंने अपने गाँव का रस्ता अलग किया

चुभने लगा था फूल जब उसकी निगाह में
तब उसने मेरे पाँव का काँटा अलग किया

गूँजी मेरी लहद में तेरी आह की सदा
ये किसने तेरे कान का झुमका अलग किया

हम दो बदन के दरमियाँ में जान एक थे
फिर तुमने मुझको किस लिए आधा अलग किया

  - Shamsul Hasan ShamS

Rishta Shayari

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