Rahul Singh Parihar

@trs_parihar

Rahul Singh Parihar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rahul Singh Parihar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

अपनी तरक़्क़ी जब गिनाने लग गए अहबाब सब हम को वहाँ से मुँह छिपाकर भागना ही पड़ गया — Rahul Singh Parihar
मिलन अंतिम हमें अपना कई वर्षों चलाना था सो अंतिम घाव पर थोड़ा नमक हम रोज़ रखते थे — Rahul Singh Parihar

Ghazal

भरा पड़ा है जमाना उन सेे ख़ुदा जो ख़ुद को बता रहे हैं वहीं यहाँ पे कुछ एक बुत हैं जो ख़ुद को इंसां बना रहे हैं हजार आँखों में ख़्वाब जिन के सजे हुए हैं वो एक साहब न जाने क्यूँ बस हमारी आँखों से ख़ुद को यकसर बचा रहे हैं ख़याल जब भी कभी हमारे लगा कि कपड़े उतार देंगे तो साथ आए कुछ एक ग़म जो हमारे दिल की रिदा रहे हैं हमारे हिस्से में आई इक शब उसी को ओढ़ें वही बिछाएं गुजारें कब तक यूँ मुफ़लिसी में सो उम्र अपनी घटा रहे हैं कहीं किसी पर अ गर खुला तो वो शे'र बिल्कुल नहीं हमारा हमें पता है कई मुनाफ़िक़ हमारी ग़ज़लों में आ रहे हैं हम इस्तिख़ारा महज़ दिखावे को रख के बैठे हैं पहली सफ़ में इसी मुखौटे की आड़ में हम हवस कि फ़स्लें उगा रहे हैं — Rahul Singh Parihar