ख़बर है क्यूँ तेरे गर्दन पे धब्बा है
मेरी थाली का खाना फिर से जूठा है
बता सकता हूँ कल वो साथ था तेरे
तुझे उसने मुझे इस शब ने काटा है
बता देती तो क्या मैं रोक लेता था
उसे तो जिस्म मुझको रूह पाना है
ये ज़ुल्फ़ें चाल ज़ाहिर कर रही हैं सब
उसी ने हाँ तेरा नक़्शा बिगाड़ा है
कभी भी शादी कर लूँगा तू आना बस
कहाँ बाज़ार में अब फूल ताज़ा है
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