अगर जो हिज्र को मेरी तरह काटा करोगे तुम
बहुत उम्दा करोगे तुम बहुत 'आला करोगे तुम
तरस जो मुझपे खाओगे तो फिर अच्छा नहीं होगा
तरस खाकर तो मुझपे वक़्त को ज़ाया' करोगे तुम
अगर होगे कभी तन्हा तो फिर तुम बैठकर यारा
यक़ीनन मुझको ही बस मुझको ही सोचा करोगे तुम
चलो माना लड़ाई करने से गर प्यार बढ़ता है
तो अब हर बात पे क्या इस तरह झगड़ा करोगे तुम
तरस खाया नहीं तुमने मुझे करते हुए तन्हा
तो लिख लो देखने तक को मुझे तरसा करोगे तुम
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