तीरगी है जीवन में रौशनी चली आओ
हाल है बुरा मेरा बेहतरी चली आओ
बेवजह ये हँसना भी यार दिल की आदत है
सब ग़लत समझते हैं बेदिली चली आओ
शहर है तुम्हारा ये हम तो इक मुसाफ़िर हैं
थोड़ी देर रुकना है तुम अभी चली आओ
चाँद आज लेटा है वो तो मेरे पहलू में
आज तुम भी खिड़की से चाँदनी चली आओ
इक कमी है जीवन में बेख़ुदी में रहते हैं
ये तो इक तमाशा है कुछ हँसी चली आओ
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