उसके कंगन उसके झुमके उसकी चूड़ी अच्छी है
गोरे तन पर उसके फिर वो साड़ी नीली अच्छी है
गाल गुलाबी नागिन ज़ुल्फ़ें चाल नदी सी क्या बोलें
क्या-क्या तुमको बतलाएँ वो तो पूरी ही अच्छी है
मैंने बोला आओ चलकर हम तुम पिज़्ज़ा खाते हैं
वो बोली मॉडर्न के पास में छोला पूड़ी अच्छी है
उसके संग गए थे इक दिन हम कतकी के मेले में
एक फ़कीर कहा था मुझ सेे बेटा जोड़ी अच्छी है
अब क्या अपनी नज़्मों में उसको मैं धोखेबाज़ कहूँ
उसकी भी अपनी मर्ज़ी है वैसे लड़की अच्छी है
इक-तरफ़ा मैं प्यार करुँ या जाकर के इनकार सुनूँ
एक सुख़न-वर की ख़ातिर ये भी बेचैनी अच्छी है
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