हमारा लखनऊ से राब्ता है
वही तहज़ीब में भी दिख रहा है
बहुत मशहूर है लहजा हमारा
चिकन-कारी का तो डंका बजा है
सभी के दिल को जीता है हमीं ने
हमें अब जीतने को क्या बचा है
हमारे ख़्वाब में आते हो हर दिन
कहो तुम ही ये कैसा फ़ासला है
तुम्हारी याद से छुट्टी मिली तो
मुझे ख़ुद के लिए कुछ सोचना है
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