बहुत समय से मिला नहीं हूँ तभी है दिल बे-क़रार मेरा
तुम्हें जो देखा तड़प के इसने यही पुकारा वो यार मेरा
पलट के देखा कभी जो उस ने दिखाई देगी उसे हक़ीक़त
जो हमनवा था वो हम सफ़र हो मिले दोबारा वो प्यार मेरा
मुझे पता है कि एक दिन वो किसी जगह पर खड़ी मिलेगी
नहीं दिखाई कोई भी देगा करेगी तब इंतिज़ार मेरा
अगर बुलाना मुझे जो घर में ख़याल रखना बहक न जाऊँ
मैं आदमी हूँ नहीं मैं पत्थर कभी न कर ए'तिबार मेरा
— Prashant Arahat















