उसे जिस ने देखा लगातार देखा
वही रूप उस का लगातार देखा
वो चेहरे की रौनक वो संदल सी ख़ुशबू
वही चाँद चेहरा लगातार देखा
दरीचे से मैं ने उसे जब पुकारा
किया फिर इशारा लगातार देखा
तुम्हें देख कर जब गया था यहाँ से
तो ख़्वाबों में सेहरा लगातार देखा
वो जब भी मिली है अचानक मिली है
करिश्मा ख़ुदा का लगातार देखा
उसे जब मिले हम तो अंधों के जैसा
बहुत ही टटोला लगातार देखा
— Prashant Arahat















