ये दिल इक पत्थर हो सकता है
इस से भी बदतर हो सकता है
उल्फ़त के जंगल में मत फँसना
मजनूँ भी अजगर हो सकता है
तुम जौहर जैसे मैं मुक्ता सी
दोनों में अंतर हो सकता है
दुनिया नज़रों पर काम करें तो
किन्नर भी अफ़सर हो सकता है
चिमटे वाले हाथों में कॉपी
ये प्यारा मंज़र हो सकता है
गुलशन को देखूँ तो लगता है
ये तुझ सा सुंदर हो सकता है
जो ग़म पी रक्खा मय-ख़ाने में
ऐसे भी बाहर हो सकता है
— Bhoomi Srivastava















