हवा बन के कभी मुझ से तू साँसों में मिला कर
वहाँ मिलना अगर मुश्किल हो ख़्वाबों में मिला कर
मैं नज़्मों के जहॉं की बन सकूँ रानी किसी दिन
इसी ख़ातिर तू मुझको मेरे लफ़्ज़ों में मिला कर
ज़माना सख़्त दुश्मन है मुहब्बत के ख़ुदा का
हो मुमकिन तो मुझे नफ़रत के कस्बों में मिला कर
तुझे फ़ुर्सत नहीं गुल बन के मेरे वास्ते तो
चुभन बन के सही तू मुझ को खारों में मिला कर
जहाँ खुल के तू अपने ग़म मेरी आँखों में रख दे
उन्हीं बे-मतलबी सी मेरी बाँहों में मिला कर
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