तू भले बात बदल और न बतला दुख है
तेरे चेहरे पे लिखा है कोई गहरा दुख है
ये भी मुमकिन है तेरे काम न आऊँ लेकिन
तू मुझे अपना समझ और बता क्या दुख है
साथ रहता था मेरे कितने बरस से दिलकश
फिर मुझे छोड़ गया या-ख़ुदा कैसा दुख है
पहले ये करता रहा टाल-मटोली मुझ से
फिर मेरे दिल ने दबे मन से क़ुबूला दुख है
बात तो हँस के ही करता हूँ, करूँगा हरदम
हाँ ज़रा वक़्त बुरा है अभी माना दुख है
तू मेरा हाथ पकड़ साथ मेरे चल देखें
अपनी क़िस्मत में अभी और भी कितना दुख है
— Gaurav Singh















