उस सेे बिछड़ते वक़्त मेरे दिल को ये लगा

जैसे मैं जान बूझ के भटका हूँ रास्ता

कहते हैं लोग भूल जा उस को वो जा चुकी
कैसे भुला दूँ बोलिए शाइ'र हूँ ज़ात का

मालिक कमाल कर दिया वैसे ये आपने
दोनों को आज तक कोई साहिल नहीं दिया

मुझ को मेरे मिजाज़ की लड़की नहीं मिली
उस को नहीं मिला कोई उस के मिजाज़ का

ऐसे भी लोग हैं यहाँ जो अपने नाम से
महफ़िल में पढ़ के आ गए मक़्ता मजाज़ का।

— Gaurav Singh

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