भूख को बिस्तर बना कर सो गए हम
नींद को चादर बना कर सो गए हम
घर कि जिसके ख़्वाब आते थे हमेशा
ख़्वाब में वो घर बना कर सो गए हम
हम जिसे दुनिया बना सकते थे उसको
राह का पत्थर बना कर सो गए हम
जिस्म को निगरानी में अपने लगाकर
साए को पैकर बना कर सो गए हम
चाँद तारों के तले सब दुख भुलाकर
इन को चारागर बना कर सो गए हम
बेख़बर शकुनी के बदले की तड़प से
एक दिन चौसर बना कर सो गए हम
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