baatein bhi karti hain to pedon se ya gagan se | बातें भी करती हैं तो पेडों से या गगन से

  - Gaurav Singh

बातें भी करती हैं तो पेडों से या गगन से
रखती नहीं है मीरा ख़्वाहिश कोई किशन से

हम प्यार करने वाले लश्कर से लड़ लें लेकिन
डरते हैं यार तेरे माथे की इक शिकन से

सागर में जैसे कोई तूफान सा उठा हो
महसूस हो रहा है हमको तेरे छुवन से

ग़ालिब के शे'र तूने बचपन से ही पढ़े हैं
आती है वो ही खुश्बू शायर तेरे कहन से

रोटी के वास्ते ही सब कुछ करे है दुनिया
रोटी कमा रहा है यारों कोई कफ़न से

बारिश का हाल ऐसा खेती के मौसमों में
जैसे हो कोई दुल्हन रूठी हुई सजन से

वो पास में हो बैठी लेकिन हों घर में बच्चे
कुछ भी हसीं नहीं है दुनिया में इस चुभन से

बस नाम की वज़ह से हम शे'र कह रहे है
वरना हमें क्या मतलब है मीर या सुख़न से

  - Gaurav Singh

Gulshan Shayari

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