मेरे मालिक ये क्या किया तुम ने
सर से साया हटा दिया तुम ने
याद आने लगा है क्यूँ कोई
क्या पिलाया है साक़िया तुम ने
वो भी रावण निकल गए जिन को
यार समझा था औलिया तुम ने
एक मुझ से ही हो ख़फ़ा वरना
कैसे कैसों को दिल दिया तुम ने
हो गई शा'इरी ग़ज़ब तुम से
ले लिया दुख का क़ाफ़िया तुम ने
— Gaurav Singh















