दूसरों की पगड़ियों को मत उछाल सोच ले
बा'द में तुझे भी होना है मलाल सोच ले
तोड़ दे ये बेड़ियाँ तू कर हवा का सामना
तेरी ये उड़ान होगी इक मिसाल सोच ले
ये दुकान ये मकान ये बदन भी मेरा है
मार देगा तुझ को भी यही ख़याल सोच ले
इस ज़बाँ से तू निकाल ख़ुशबू बस गुलाब की
तू तभी बनेगा हज़रते बिलाल सोच ले
— Meem Alif Shaz















