दूरी मुझ सेे बढ़ा रही है वोदिल कहीं और लगा रही है वोबात करने की कह के सो गई वोरात भर यूँ जगा रही है वोप्यार पहली दफ़ा हुआ मुझ कोये किसे अब बता रही है वोआसमाँ पर बिठाया था उस नेअब ज़मीं में दबा रही है वोआसमाँ में धुआँ उठा कालाख़त मेरे सब जला रही है वो— Manoj Devdutt