कौन अनहद है किस की हद है यहाँ
बस वही है जो मुस्तनद है यहाँ
उस के होने से है जहाँ का वजूद
वरना हर शय ही लावलद है यहाँ
मौत के बा'द फ़ानी दुनिया में
'प्रीत' बस तू ही मोतमद है यहाँ
— Prit
बस वही है जो मुस्तनद है यहाँ
उस के होने से है जहाँ का वजूद
वरना हर शय ही लावलद है यहाँ
मौत के बा'द फ़ानी दुनिया में
'प्रीत' बस तू ही मोतमद है यहाँ
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling