हम हैं दरवेश घर से क्या हमको
हर कहीं पर मिला ख़ुदा हमको
दश्त हो सहरा हो समंदर हो
हर तरफ़ बस वही दिखा हमको
सूफ़ियाना मिज़ाज है अपना
राम अल्लाह सब एक सा हमको
हुस्न-ए-यूसुफ़ सियाह रंग का था
सूरत-ए-कृष्ण में दिखा हमको
या तो दिल में सँभाल के रख प्रीत
या तेरे नैनों से बहा हमको
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