गीत मैं गुनगुनाता रहा रात भर
ऐसे उस को सुलाता रहा रात भर
ख़्वाब में रौशनी माँग ली उस ने फिर
मैं सितारे बनाता रहा रात भर
जान कर के भी सच चुप रहा मैं मगर
वो बहाने बनाता रहा रात भर
सारी ग़लती ही मैं अपने सर ले गया
और रिश्ते बचाता रहा रात भर
मुझ से सच कहने की उस की हिम्मत न थी
राज़ मैं भी छुपाता रहा रात भर
— Ankit Raj















