आँखों का कोई ख़्वाब बिखरने नहीं दिया
ज़िंदा रखा है 'इश्क़ को मरने नहीं दिया
जिन रास्तों पे फूल बिछे थे तमाम ''उम्र
दिल ने वहाँ से मुझको गुज़रने नहीं दिया
इस बे-वफ़ा जहान में बस आप के लिए
अहद-ए-वफ़ा से ख़ुद को मुकरने नहीं दिया
मैं मर गया तो ज़िंदा ही मर जाएगा कोई
बस इस ख़याल ने मुझे मरने नहीं दिया
तुम साथ मिल के सब मेरे जज़्बे की दाद दो
साए से अपने आप को डरने नहीं दिया
मेरी ज़रूरियात ने मुझको कभी 'शजर'
इक पल कहीं सुकूँ से ठहरने नहीं दिया
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