muhabbat kii agar is dil ko beemaarii nahin hoti | मुहब्बत की अगर इस दिल को बीमारी नहीं होती

  - Shajar Abbas

मुहब्बत की अगर इस दिल को बीमारी नहीं होती
मुसीबत मुझ पे दुनिया की कोई तारी नहीं होती

अगर मेरे क़बीले में अलमदारी नहीं होती
यक़ीनन मेरी नस्लों में वफ़ादारी नहीं होती

तरक़्क़ी याबी से महरूम रह जाती हैं वो क़ौ
में
जवाँ बच्चों में जिन क़ौमों के बेदारी नहीं होती

ख़ुदा का शुक्र सब हिन्दा मिज़ाजी के मुख़ालिफ़ हैं
हमारे शहर में हमज़ा जिगरख़्वारी नहीं होती

इसे सीने के अन्दर से निकालो फेंक दो बाहर
सबील-ए-इश्क़ नहर-ए-दिल से गर जारी नहीं होती

अगर हम मक़सद-ए-करबोबला तक आ गए होते
तो हक़ गोई में हमको कोई दुश्वारी नहीं होती

सदा रुसवाइयाँ बनती हैं उन लोगों की तक़दीरें
लहू में जिनके भी तहज़ीब-ए-ख़ुद्दारी नहीं होती

तिरे सजदे तेरी बख़्शिश को काफ़ी थे हक़ीक़त में
अगर तेरी इबादत में रियाकारी नहीं होती

शजर हम जिससे मिलते हैं ख़ुलूस-ए-दिल से मिलते हैं
कभी भी हमने रिश्तों में अदाकारी नहीं होती

  - Shajar Abbas

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