तकलीफ़ कोई रंज अलम सहने न दूँगा
मुश्किल में गिरफ़्तार तुझे रहने न दूँगा
जब तक है मिरे जिस्म में जाँ बाक़ी मिरी जाँ
आँखों से तिरी अश्क कभी बहने न दूँगा
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