जो आशिक़ है मगर पागल नहीं है
समझ लो इश्क़ में अव्वल नहीं है
बिना उस के मिरी सूनी है दुनिया
दिलों में अब कोई हलचल नहीं है
सुकूँ की नींद भी आए तो कैसे
तेरी यादों का जो कंबल नहीं है
मोहब्बत में सभी मारे गए हैं
जहाँ में दूसरा मक़्तल नहीं है
भले ही दूर मुझ से हो गया वो
अभी भी आँखों से ओझल नहीं है
— Shivsagar Sahar















