इस जहाँ भर में मैं किसको जानता हूँ
रब ख़ुदा भी मैं तुझे ही मानता हूँ
आ गया तेरे बुलाने पर यहाँ मैं
बस यहाँ इक शख़्स को पहचानता हूँ
कोई हिस्सा तो मिले मुझको ख़ुशी का
इस तरह मैं अपने ग़म को छानता हूँ
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