सबका आकार समझने वाले
सब को लाचार समझने वाले
मुँह छिपाए वो फिरेंगे इक दिन
हम को बेकार समझने वाले
फ़ायदा लोग उठाए हैं पर
कुछ मिले यार समझने वाले
— Shubham Rai 'shubh'
सब को लाचार समझने वाले
मुँह छिपाए वो फिरेंगे इक दिन
हम को बेकार समझने वाले
फ़ायदा लोग उठाए हैं पर
कुछ मिले यार समझने वाले
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling