सबका आकार समझने वाले
सबको लाचार समझने वाले
मुँह छिपाए वो फिरेंगे इक दिन
हमको बेकार समझने वाले
फ़ायदा लोग उठाए हैं पर
कुछ मिले यार समझने वाले
As you were reading Shayari by Shubham Rai 'shubh'
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