जिस का था इंतिज़ार वो गाड़ी निकल गईपानी समझ के जो पिया ताड़ी निकल गईमहबूब को मियाँ कल अनाड़ी जो समझा थामुझ से बिछड़ते ही वो खिलाड़ी निकल गई— Shubham Rai 'shubh'