ये किस भूक में अंजुमन जल गया
है साज़िश सियासी वतन जल गया
लगा था कि आसान होगा सफ़र
कड़ी धूप में पैरहन जल गया
न मोमिन हुआ तू न काफ़िर हुआ
गया क़ब्र में तो कफ़न जल गया
फ़रेबी बहारें सितमगर सबा
जहाँ से चली वाँ चमन जल गया
सुख़न-दान कोई मिला ही न जब
हुआ ये कि लुत्फ़-ए-सुख़न जल गया
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