तमाम कोशिशें बेकार हो गई अहमद
वो आँखें और की तलबगार हो गई अहमद
वो मुझको छोड़ गया सारे वादे तोड़ गया
तमाम क़स
में भी लाचार हो गई अहमद
उसे तो मिल गया जो उसने चाहा था लेकिन
मिरी दुआएँ तो बेकार हो गई अहमद
उन्हें रिहा किया उनके हसीन होने पर
मिरी दलीलें गिरफ़्तार हो गई अहमद
के इनके होते हुए भी उसे गँवाना पड़ा
हमारी नेकियाँ गद्दार हो गई अहमद
वो साथ थी तो ग़मों से नजात मिल रही थी
जो बिछड़ी ख़ुशियाँ भी दो-चार हो गई अहमद
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