
दिल को ले कर सुब्ह से ये ही गुमान आ रहा है
जब कोई ज़ख़्म नहीं क्यूँ ये निशान आ रहा है
तुम पे रहमत भी अज़ीयत की तरह बरसेगी
देखते जाओ कि अहमद रमाज़ान आ रहा है
— Faiz Ahmad
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