is darza us ke saanche men dhaalunga KHud ko main | इस दर्ज़ा उस के साँचे में ढालूँगा ख़ुद को मैं

  - Ankit Yadav

इस दर्ज़ा उस के साँचे में ढालूँगा ख़ुद को मैं
फिर और कोई शख़्स बना लूँगा ख़ुद को मैं

उलझा रहा हूँ तुझ से बिछड़ने की बात पर
ख़ुद से बिछड़ के कैसे सँभालूँगा ख़ुद को मैं

उसने ही रख दिए हैं जलाने के सब सबब
अब क्या किसी से आग लगा लूँगा ख़ुद को मैं

ख़्वाबों में वो मिला तो ये एहसास हो गया
जागा रहूँगा अब भी तो पा लूँगा ख़ुद को मैं

  - Ankit Yadav

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