jo bhi aate hain vo bas tod ke chal dete hain | जो भी आते हैं वो बस तोड़ के चल देते हैं

  - Ansar Ethvi

जो भी आते हैं वो बस तोड़ के चल देते हैं
कैसे समझाऊँ शजर कैसे ये फल देते हैं

ख़ुशबू होती है तो सीने से लगाए रखते
सूख जाएँ तो ये फूलों को मसल देते हैं

मैंने देखा है यहाँ रहते हुए दुनिया में
अपने रहबर ही यहाँ रस्ता बदल देते हैं

होता आया है मिरे साथ में ऐसा अक्सर
टूटते ख़्वाब ही नींदों में ख़लल देते हैं

तुमने बदले में दिया कुछ भी नहीं है उसको
देने वाले तो मोहब्बत में महल देते हैं

कोई क्या ख़ाक भरोसा ही करे अपनों पर
अपने पैरों से ही अपनों को कुचल देते हैं

  - Ansar Ethvi

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