वो ठोकर से गिराना चाहता है
मुझे पत्थर पे लाना चाहता है
जिसे अपना समझता हूँ जहाँ में
वो रस्ते से हटाना चाहता है
उसे होते नहीं देखा किसी का
मगर उसको ज़माना चाहता है
वो ख़ंजर साथ रखता है हमेशा
वो ही नश्तर मिटाना चाहता है
ले मैं अब आ गया तेरी ही महफ़िल
बता तू क्या बताना चाहता है
वो जिस सेे कर रहा वादा-ए-उलफ़त
उसे बिस्तर पे लाना चाहता है
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